
कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) सेब सीजन के चरम पर होने के बावजूद जिला कुल्लू में सरकारी उदासीनता के कारण बागबानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने पत्रकार वार्ता में कहा कि मंडी-कुल्लू सड़क मार्ग पर लगातार भूस्खलन और सरकारी स्तर पर उचित व्यवस्था न होने के कारण सेब समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे बागबानों को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
सी ग्रेड सेब फेंकने को मजबूर
गोविंद सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि इस वर्ष सरकार ने अभी तक एक भी सेब कलेक्शन सेंटर नहीं खोला है, जबकि हर साल 15 जुलाई तक ऐसे सेंटर शुरू कर दिए जाते थे।
कलेक्शन सेंटरों के अभाव में बागबानों को सी ग्रेड का सेब नदी-नालों में फेंकना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक व मानसिक क्षति हो रही है।
मंडी-कुल्लू सड़क मार्ग बना मुसीबत
पूर्व मंत्री ने मंडी से कुल्लू के बीच सड़क की बदहाल स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि इस सड़क मार्ग से कुल्लू, लाहौल-स्पीति और मंडी का एक बड़ा क्षेत्र जुड़ा है। लेकिन बार-बार भूस्खलन के कारण यहां तीन-तीन दिन तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।
“सरकार को चाहिए कि युद्ध स्तर पर सड़क बहाली का काम करे। ना खाने की व्यवस्था है, ना पानी की। लोग फंसे रहते हैं, कोई सुध लेने वाला नहीं है।” – गोविंद सिंह ठाकुर
करोड़ों का कारोबार, फिर भी उपेक्षा
कुल्लू में हर साल लगभग 1500 से 2000 करोड़ रुपए का सेब कारोबार होता है। ऐसे में यदि फसल समय पर मंडियों तक नहीं पहुंची, तो यह प्रदेश की आर्थिक सेहत पर भी असर डाल सकता है।
सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग
गोविंद सिंह ठाकुर ने प्रदेश सरकार से मांग की कि:
सेब कलेक्शन सेंटरों को तुरंत खोला जाए।
मंडी-कुल्लू सड़क मार्ग पर स्थायी समाधान किया जाए।
सेब सीजन को देखते हुए आवश्यक परिवहन, पानी और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
जिला कुल्लू में बागबान संकट में हैं और सरकार की लापरवाही उनके जीविकोपार्जन पर सीधा असर डाल रही है। यदि समय रहते सरकार ने कदम नहीं उठाए, तो इसका खामियाजा हजारों बागबानों और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ सकता है।



