
जिला कुल्लू में भारी बारिश और भूस्खलन के चलते एनएच-03 (मंडी-कुल्लू राष्ट्रीय राजमार्ग) एक बार फिर बागबानों के लिए मुसीबत बन गया है। सड़क मार्ग के लगातार बाधित होने से सेब और नाशपाती से लदी गाड़ियां फंस गई हैं, जिससे फल समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पा रहे। इससे बागबानों को भारी नुकसान होने की आशंका है।
ट्रैफिक जाम ने बढ़ाई मुसीबत
बुधवार को एनएच-03 को एकतरफा यातायात के लिए खोला गया, लेकिन भारी ट्रैफिक और संकरे मार्ग के कारण गाड़ियां रेंग-रेंग कर चलती रहीं। टकोली, पनारसा और बनाला क्षेत्रों में सेब-नाशपाती से लदे ट्रक घंटों फंसे रहे। कई जगहों पर ट्रकों की लंबी कतारें लग गईं।
वैकल्पिक मार्ग भी बंद
एनएच-03 के अलावा कंडी-कटौला-कमांद वाया बजौरा मार्ग भी बुधवार को बंद रहा, जिससे वैकल्पिक रूट का उपयोग भी नहीं हो पाया। बार-बार हो रहे भूस्खलन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
बागबानों को भारी आर्थिक नुकसान का खतरा
इस समय कुल्लू जिला में सेब और नाशपाती का सीजन जोरों पर है। किसान इन फलों को दिल्ली, लुधियाना व अन्य प्रमुख मंडियों में भेज रहे हैं। ट्रकों के फंसने से फल खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है। समय पर मंडियों तक माल नहीं पहुंचने से कीमतें गिरने की भी आशंका है।
NHAI के लिए बनी चुनौती
बार-बार हो रहे भूस्खलन और ट्रैफिक दबाव के चलते एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के लिए सड़क को सुचारु रखना बड़ी चुनौती बन गया है। स्थानीय लोगों और बागबानों ने तत्काल और स्थायी समाधान की मांग की है।
स्थानीय लोगों की मांग
युद्ध स्तर पर सड़क बहाली का काम किया जाए
भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में मजबूत सुरक्षा दीवारें और ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए
सेब और अन्य फसलों की तेजी से ढुलाई के लिए विशेष ट्रैफिक प्रबंधन लागू हो
एनएच-03 पर बार-बार हो रहे भूस्खलन और ट्रैफिक जाम ने किसानों व बागबानों की कमर तोड़ कर रख दी है। यदि जल्द ही स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो यह न केवल आर्थिक नुकसान देगा, बल्कि किसानों की मनःस्थिति पर भी बुरा प्रभाव डालेगा।



