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बिना UPSC परीक्षा बन सकते हैं केंद्र सरकार में अधिकारी! जानें क्या है ‘लैटरल एंट्री’ और क्यों नहीं मिलता इसमें आरक्षण

UPSC भर्ती के बिना केंद्र सरकार में अधिकारी बनने का रास्ता  क्या है लैटरल एंट्री और क्यों नहीं मिलता इसमें आरक्षण?
 UPSC की परीक्षा दिए बिना केंद्र सरकार में डायरेक्टर, डिप्टी सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी जैसे पदों पर नियुक्ति मुमकिन है। यह रास्ता है लैटरल एंट्री। हाल ही में केंद्र सरकार ने जानकारी दी कि साल 2018 से अब तक लैटरल एंट्री के जरिए कुल 63 अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। ये नियुक्तियां विशेष प्रोजेक्ट्स और विशेषज्ञता-आधारित असाइनमेंट्स के लिए की गई थीं।
हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इसमें आरक्षण लागू क्यों नहीं होता? सरकार और UPSC दोनों ने इसका जवाब दिया है।

क्या है लैटरल एंट्री (Lateral Entry)?
लैटरल एंट्री भारत सरकार की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें निजी क्षेत्र, अकादमिक संस्थानों, पब्लिक सेक्टर यूनिट्स (PSUs) या अन्य गैर-सरकारी क्षेत्रों से विशेषज्ञों को सीधे वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किया जाता है। इन पदों में मुख्यतः जॉइंट सेक्रेटरी, डायरेक्टर और डिप्टी सेक्रेटरी शामिल होते हैं।

इसका उद्देश्य है कि सरकार में विशेषज्ञता, अनुभव और नया दृष्टिकोण लाया जा सके जिससे नीतियों को प्रभावशाली रूप से लागू किया जा सके।

कब शुरू हुई यह नीति?
लैटरल एंट्री का औपचारिक प्रस्ताव पहली बार 2005 में दूसरी प्रशासनिक सुधार समिति (Second ARC) द्वारा दिया गया था। बाद में, नीति आयोग और सचिवों के समूह (SGoS) ने 2017 में इसकी सिफारिश की।

2018 में मोदी सरकार ने इसे पहली बार लागू किया और जॉइंट सेक्रेटरी लेवल के लिए पदों का विज्ञापन जारी किया।
कैसे होता है सेलेक्शन?
लैटरल एंट्री की भर्ती प्रक्रिया UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) द्वारा संचालित होती है:
UPSC ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करता है

उम्मीदवारों को संबंधित क्षेत्र में अनुभव और विशेषज्ञता दिखानी होती है
शॉर्टलिस्टिंग और इंटरव्यू के बाद चयन होता है
चयनित उम्मीदवारों को 3 साल का अनुबंध मिलता है, जिसे 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है

उम्र और अनुभव की न्यूनतम शर्तें:
जॉइंट सेक्रेटरी: 15 साल अनुभव, उम्र 40-55 साल
डायरेक्टर: उम्र 35-40 साल

डिप्टी सेक्रेटरी: उम्र 32-40 साल
क्यों नहीं मिलता आरक्षण?
लैटरल एंट्री को लेकर सबसे बड़ा विवाद है कि इसमें SC, ST, OBC के लिए आरक्षण लागू नहीं होता।

कार्मिक राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि ये नियुक्तियां “सिंगल-पोस्ट कैडर” के अंतर्गत आती हैं और सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले (PGIMER बनाम फैकल्टी एसोसिएशन, चंडीगढ़) के अनुसार, ऐसे पदों पर आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता।
इसलिए BCCI या UPSC ने चयनित उम्मीदवारों का जाति आधारित कोई डेटा भी नहीं रखा।

अब तक कितनी नियुक्तियां हुईं?

सरकार ने बताया कि:
2018, 2021 और 2023 — तीन चरणों में कुल 63 नियुक्तियां
इसमें से 43 अधिकारी अभी भी कार्यरत हैं
सभी अधिकारी विभिन्न मंत्रालयों में नीतिगत और प्रशासनिक कार्यों में योगदान दे रहे हैं

विवाद और बदलाव की संभावना
2023 में लैटरल एंट्री में आरक्षण न होने को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। UPSC ने अगस्त 2023 में 45 पदों के लिए जारी एक लैटरल एंट्री विज्ञापन को रद्द कर दिया था।

इसके पीछे मंत्री जितेंद्र सिंह की सिफारिश थी, जिन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री सामाजिक न्याय को प्राथमिकता देते हैं और नीति में समीक्षा की ज़रूरत है।

सरकार की मंशा क्या है?
सरकार का कहना है कि वह इस नीति को और अधिक पारदर्शी और समावेशी बनाना चाहती है। भविष्य में लैटरल एंट्री प्रक्रिया में आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़ी संवेदनशीलताओं को शामिल करने की योजना हो सकती है।

लैटरल एंट्री एक ऐसा मार्ग है जो UPSC की कठिन परीक्षा दिए बिना भी भारत सरकार में उच्च पदों पर नियुक्ति का अवसर देता है — लेकिन यह पूरी तरह से अनुभव, विशेषज्ञता और चयन प्रक्रिया पर आधारित है। हालांकि इसमें आरक्षण लागू नहीं होता, लेकिन सरकार इस नीति को सुधारने और ज्यादा समावेशी बनाने की दिशा में काम कर रही है। लैटरल एंट्री यानी बिना परीक्षा, सीधे केंद्र सरकार में बड़ी नौकरी — मगर अभी आरक्षण से बाहर। 

Kullu Update
Author: Kullu Update

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