
शिमला के पराला मंडी में खौफनाक वारदात: चाकू की नोक पर लूट, घायल युवक को पुलिस चौकी से भी नहीं मिली मदद
शिमला राजधानी शिमला के समीप स्थित पराला मंडी में शनिवार रात एक दहला देने वाली घटना सामने आई है। 38 वर्षीय सागर, जो कि चौपाल क्षेत्र का निवासी है, चाकू की नोक पर लूट का शिकार हो गया। इस हमले में वह बुरी तरह घायल हो गया और खून से लथपथ हालत में इधर-उधर मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन उसे तत्काल सहायता नहीं मिल सकी।
घायल सागर ने खुद पहुंची पुलिस चौकी, नहीं मिली मदद
घटना के बाद घायल अवस्था में सागर खुद किसी तरह घसीटता हुआ पास की पुलिस गुमटी तक पहुंचा, लेकिन आरोप है कि वहां से उसे कोई सहायता नहीं मिली। वह मदद की गुहार लगाता रहा, परन्तु पुलिसकर्मियों की बेरुखी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। इस दौरान स्थानीय लोग भी तमाशबीन बने रहे, जिससे मानवता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जागरूक नागरिक ने बचाई जान, 108 एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचा
अंततः एक जागरूक नागरिक ने 108 एंबुलेंस सेवा को कॉल किया और घायल सागर को सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। वहां से उसकी गंभीर हालत को देखते हुए शिमला रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, यदि समय पर प्राथमिक उपचार न मिला होता, तो सागर की जान जा सकती थी।
पीड़ित का बयान: “पुलिस चौकी में मदद नहीं मिली”
घायल सागर ने अस्पताल में दिए अपने बयान में पुलिस की लापरवाही पर गंभीर आरोप लगाए। उसका कहना था,
“मैं खून से लथपथ होकर खुद पुलिस के पास गया, पर वहां से कोई मदद नहीं मिली। अगर एंबुलेंस समय पर नहीं आती, तो मेरी जान भी जा सकती थी।”
पुलिस ने शुरू की जांच, स्थानीयों में आक्रोश
घटना के बाद पुलिस ने लूटपाट और हमले का मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, स्थानीय लोगों ने पुलिस की निष्क्रियता पर कड़ा रोष जताया है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस चौकी पर तैनात कर्मचारी समय पर सक्रियता दिखाते, तो घायल को समय पर इलाज मिल सकता था।
प्रशासन पर सवाल, सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता
पराला मंडी जैसे व्यस्त इलाके में इस तरह की वारदात और फिर पुलिस की लचर प्रतिक्रिया से स्थानीय नागरिकों में असुरक्षा का माहौल बन गया है। सवाल उठ रहे हैं कि यदि सार्वजनिक स्थानों पर भी नागरिक सुरक्षित नहीं, तो आमजन किससे उम्मीद करे?
यह घटना कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक ओर जहां लूट और हिंसा आम होती जा रही है, वहीं पुलिस की निष्क्रियता इन घटनाओं को और भयावह बना रही है। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाए और पुलिस प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।



