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हिमाचल को मिलेंगे छह अत्याधुनिक फोरेंसिक लैब वाहन, सितंबर में जुन्गा, धर्मशाला, मंडी समेत छह स्थानों को बड़ी सुविधा

 हिमाचल प्रदेश में अब क्राइम सीन की फॉरेंसिक जांच तकनीकी रूप से और अधिक प्रभावी होने जा रही है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर आपराधिक मामलों में घटनास्थल पर फोरेंसिक जांच को अनिवार्य किए जाने के बाद प्रदेश को सितंबर माह में छह अत्याधुनिक फोरेंसिक लैब वाहन मिलने जा रहे हैं।

इन मोबाइल लैब्स को पहले चरण में राज्य की छह प्रमुख फोरेंसिक इकाइयों को सौंपा जाएगा:
राज्य फोरेंसिक लैब, जुन्गा (शिमला)
नॉर्थ जोन लैब, धर्मशाला
सेंट्रल जोन लैब, मंडी
जिला फोरेंसिक यूनिट, नूरपुर
बद्दी
बिलासपुर

 चलती-फिरती फोरेंसिक लैब  तकनीक से भरपूर
इन फोरेंसिक लैब व्हीकलों को टाटा कंपनी द्वारा विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक वाहन को एक चलती-फिरती मिनी लैब के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिसमें कई अत्याधुनिक उपकरण शामिल होंगे, जैसे:

ड्रग डिटेक्शन किट
एक्सप्लोसिव डिटेक्शन किट
फिंगरप्रिंट और फुटप्रिंट किट
डीएनए संग्रहण और परीक्षण किट
साइबर जांच सॉफ्टवेयर

वीडियो कैमरा, जनरेटर और फील्ड फ्रिजिंग सुविधा
हर वाहन की अनुमानित लागत ₹60 से ₹65 लाख है। इस तकनीकी नवाचार से घटनास्थल पर ही साक्ष्यों का प्रारंभिक परीक्षण संभव होगा, जिससे मामलों की जांच में तेज़ी आएगी और साक्ष्य की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

 दूसरे चरण में और 6 फोरेंसिक यूनिट्स को मिलेंगी गाड़ियाँ
इस योजना के दूसरे चरण में प्रदेश की अन्य छह फोरेंसिक यूनिट्स को भी ऐसे ही अत्याधुनिक फील्ड व्हीकल दिए जाने की योजना है। इससे राज्य में वैज्ञानिक जांच की पहुंच और क्षमता दोनों में वृद्धि होगी।

 फोरेंसिक निदेशक डॉ. मीनाक्षी महाजन का बयान
राज्य फोरेंसिक निदेशालय, जुन्गा की निदेशक डॉ. मीनाक्षी महाजन ने बताया
“बीएनएस की नई व्यवस्था के अंतर्गत फोरेंसिक टीम का घटनास्थल पर पहुँचना अब अनिवार्य हो गया है। ऐसे में ये आधुनिक वाहन जांच को तेज़, सटीक और वैज्ञानिक बनाएंगे। इससे साक्ष्य संग्रहण, विश्लेषण और केस सुलझाने की प्रक्रिया कहीं अधिक प्रभावी हो पाएगी।”

 अपराध जांच में तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
यह पहल हिमाचल प्रदेश को अपराध जांच में तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर एक महत्वपूर्ण मोड़ पर ले जा रही है। प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए, ये मोबाइल फोरेंसिक लैब्स दुर्गम इलाकों तक भी त्वरित पहुंच सुनिश्चित करेंगी।
इससे साक्ष्य संग्रहण में देरी, छेड़छाड़ और जांच में अड़चनें कम होंगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया और भी अधिक प्रभावी और विश्वसनीय हो सकेगी।

सितंबर 2025 से हिमाचल प्रदेश में अपराध जांच का तरीका बदलेगा  तेज़, वैज्ञानिक और मोबाइल। फोरेंसिक साइंस को现场 पर सक्रिय रूप से लाकर, राज्य सरकार और विभाग एक टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉ एंड ऑर्डर सिस्टम की ओर अग्रसर हैं।

Kullu Update
Author: Kullu Update

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