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कुल्लू में दिन-रात बरसात, लेकिन लोग प्यासे  बारिश के बीच पानी की भारी किल्लत से हाहाकार

बारिश बनी मुसीबत, पेयजल संकट गहराया
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में लगातार हो रही मूसलधार बारिश जहां एक ओर भूस्खलन और तबाही लेकर आई है, वहीं दूसरी ओर शहर के लोगों को पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है। ironic लेकिन सच्चाई यही है कि बारिश के बीच भी कुल्लू प्यासा है।

पाइप लाइनें टूटीं, ट्रीटमेंट प्लांट बंद
भारी बारिश और लैंडस्लाइड के चलते जगह-जगह पेयजल आपूर्ति लाइनें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। वहीं, सरवरी खड्ड और खलाड़ा नाला का पानी अत्यधिक मटमैला और दूषित होने के कारण शेता फाट और खलाड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को बंद करना पड़ा है।

इससे कुल्लू शहर के 11 वार्डों में जल संकट पैदा हो गया है। बाल्टियों में बारिश का पानी भरने को मजबूर लोग
रविवार को कुल्लू शहर के निवासियों को छतों से गिरते बारिश के पानी को बाल्टियों और डिब्बों में इकट्ठा कर टॉयलेट और घरेलू कामों के लिए इस्तेमाल करना पड़ा। पीने के पानी के लिए लोग सुबह से जलशक्ति विभाग के अस्पताल के पास लगे नलों और बाबड़ी जैसे पारंपरिक जल स्रोतों की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे।

 मिनरल वॉटर बना जीवन रेखा, ढाबे रहे बंद
पानी की आपूर्ति बाधित होने के कारण कई लोगों को मिनरल वॉटर की पेटियां खरीदनी पड़ीं, जो आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही हैं। इसके चलते शहर के अधिकांश ढाबों और खाने-पीने की दुकानों को भी बंद करना पड़ा, जिससे व्यापारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा।

ढाबा संचालक कहते हैं:
पानी न होने से खाना बनाना और ग्राहकों को सेवा देना संभव नहीं था, हमें मजबूरन ढाबा बंद करना पड़ा।”

लोगों की गुहार: समाधान निकाले विभाग
स्थानीय निवासी और व्यापारी जलशक्ति विभाग से स्थिति का शीघ्र समाधान करने की अपील कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि लगातार बारिश एक तरफ और पानी की अनुपलब्धता दूसरी तरफ – यह दोहरे संकट जैसी स्थिति बन चुकी है।

राहत कब मिलेगी?
कुल्लू शहर में यह स्थिति दर्शाती है कि प्राकृतिक आपदा के समय सामरिक और तकनीकी व्यवस्थाओं में मजबूती की कितनी आवश्यकता है। बरसात के मौसम में पेयजल जैसी बुनियादी जरूरत का संकट प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहा है।

Kullu Update
Author: Kullu Update

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