
रामसुभग सिंह, प्रबोध सक्सेना और संजय गुप्ता रेस में; लॉबिंग तेज, फैसला अब मुख्यमंत्री के पाले में
हिमाचल प्रदेश में विद्युत नियामक आयोग (HPERC) के अध्यक्ष पद को लेकर राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों के बीच ज़ोरदार मुकाबला शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने इस पद के लिए 30 अगस्त तक आवेदन मांगे हैं, और इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प और प्रतिस्पर्धात्मक बन गया है।
इस प्रतिष्ठित पद के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष तीन बड़े नाम सामने आए हैं
रामसुभग सिंह (पूर्व मुख्य सचिव व वर्तमान में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार)
प्रबोध सक्सेना (वर्तमान मुख्य सचिव, जिनका कार्यकाल सितंबर में समाप्त हो रहा है)
संजय गुप्ता (बिजली बोर्ड के अध्यक्ष, 1988 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी)
लॉबिंग और आपत्तियाँ
इस दौड़ में लॉबिंग भी जोर पकड़ चुकी है। खासकर संजय गुप्ता ने आवेदन प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े करते हुए राज्य सरकार को एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा है। उन्होंने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 84 और 85 का हवाला देते हुए कहा कि सिलेक्शन कमेटी के गठन के बिना आवेदन निकालना नियमों के खिलाफ है।
गुप्ता ने स्पष्ट किया कि चयन समिति में एक सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट के जज, मुख्य सचिव, और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) के अध्यक्ष या नामित व्यक्ति का होना अनिवार्य है। इस आपत्ति के बाद ऊर्जा विभाग ने संजय गुप्ता की शिकायत को विधि विभाग की सलाह के लिए भेज दिया है।
कौन कितना वरिष्ठ?
अधिकारी पद बैच वर्तमान भूमिका
रामसुभग सिंह पूर्व मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार – प्रशासनिक अनुभव और वरिष्ठता में सबसे आगे
संजय गुप्ता अध्यक्ष, हिमाचल बिजली बोर्ड 1988 तकनीकी क्षेत्र में गहरा अनुभव
प्रबोध सक्सेना मुख्य सचिव 1990 प्रशासनिक संचालन में वर्तमान अनुभव
फैसला मुख्यमंत्री के पाले में
तीनों ही अधिकारी योग्यता, अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर इस पद के मजबूत दावेदार हैं,अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री किसे प्राथमिकता देते हैं ,वरिष्ठता, तकनीकी अनुभव या प्रशासनिक कुशलता?



