
हिमाचल प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाला बजट समय पर नहीं मिलने के कारण परियोजनाओं का काम ठप हो गया है। बार-बार मांग करने के बावजूद फंड न मिलने से राज्य सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
इसका सीधा असर आउटसोर्सिंग पर रखे गए कर्मचारियों और ठेकेदारों पर पड़ा है। जल जीवन मिशन के तहत नियुक्त 400 से अधिक डाटा एंट्री ऑपरेटरों को पिछले चार महीने से वेतन नहीं मिला है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि ये कर्मचारी अब आंदोलन की तैयारी में हैं।
वहीं, मिशन के तहत जिन ठेकेदारों ने काम पूरा किया है, उन्हें भी भुगतान नहीं हुआ है, जिससे वे भी नाराज हैं और काम छोड़ चुके हैं। कई परियोजनाएं अंतिम चरण में पहुंचने के बाद भी अधूरी रह गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भी परेशानी हो रही है।
प्रदेश सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार से अभी तक बकाया राशि नहीं मिली है और मिशन के दूसरे चरण की भी घोषणा नहीं की गई है। जबकि राज्य सरकार ने अपनी ओर से सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं, जैसे कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं की जिम्मेदारी पंचायतों को सौंपना, जो इस योजना की एक अहम शर्त थी।
विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया गया, जिस पर सरकार ने यही जवाब दिया कि केंद्र से फंड की प्रतीक्षा की जा रही है। राज्य सरकार के पास फिलहाल अपने संसाधनों से भुगतान करने की क्षमता नहीं है, क्योंकि करोड़ों रुपये की राशि लंबित है।
जल जीवन मिशन के कामों में आए इस ठहराव से न केवल कर्मचारी और ठेकेदार, बल्कि आम जनता भी प्रभावित हो रही है और जवाब मांग रही है कि काम क्यों रुके हैं और कब दोबारा शुरू होंगे।



