
बरसात बनी बाधा, बस सेवाओं पर सीधा असर
हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष भी मानसून की मार ने एचआरटीसी (हिमाचल पथ परिवहन निगम) की बस सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। बार-बार हो रहे भूस्खलन और मार्ग अवरोधों के चलते कुल्लू और केलांग डिपो को कई करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।
लंबे रूट ठप, लोकल सेवाएं भी प्रभावित
विशेष रूप से कुल्लू और केलांग डिपो, जो कि राज्य के लंबी दूरी के प्रमुख रूटों जैसे मनाली-चंडीगढ़, केलांग-दिल्ली, मनाली-हरिद्वार, केलांग-शिमला और लेह-दिल्ली आदि पर बसें चलाते हैं, को बार-बार मार्ग बाधाओं के कारण बसों का संचालन रोकना पड़ा है।
मंडी-कुल्लू मार्ग, जहां पर बार-बार फोरलेन पर भूस्खलन हो रहा है, एचआरटीसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
कई बार बसें 8 से 24 घंटे तक फंसी रही हैं, जिससे न केवल यात्रियों को असुविधा हुई बल्कि डिपो को ईंधन, समय और संचालन लागत में भी भारी नुकसान झेलना पड़ा।
स्थिति इतनी गंभीर है कि कुछ रूटों पर मंडी से ही बसें भेजनी पड़ रही हैं, जिससे कुल्लू और केलांग डिपो का सीधा रेवेन्यू घटा है।
2023 की पुनरावृत्ति, 2025 और भयावह
HRTC के अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2023 में भी भारी बारिश से बस सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई थीं, लेकिन 2025 में स्थिति और भी खराब रही है।
केलांग डिपो को अकेले दो-ढाई महीने में करोड़ों का घाटा हो चुका है।
वहीं, कुल्लू डिपो का नुकसान इससे भी अधिक आंका जा रहा है, क्योंकि यहां लोकल रूट तक पूरी तरह ठप हो गए हैं।
स्थानीय यात्रियों को भारी परेशानी
बसें न चल पाने के कारण यात्रियों को भी वैकल्पिक यातायात साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो या तो अनुपलब्ध हैं या फिर अत्यधिक महंगे हैं। इससे यात्रियों की जेब पर असर पड़ा है और यात्रा असुरक्षित भी बन गई है।
HRTC को चाहिए विशेष सहायता योजन
परिवहन विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान झेल रही HRTC के लिए सरकार को एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। साथ ही, ऐसे जोखिम वाले मार्गों की वैकल्पिक और सुरक्षित योजना बनानी भी समय की मांग है।
कुदरत से मुकाबले की जरूरत
प्राकृतिक आपदाएं रोकी नहीं जा सकतीं, लेकिन सिस्टम और रणनीति के माध्यम से उनके असर को कम किया जा सकता है।
HRTC को हर वर्ष मानसून के दौरान करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ता है – यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यह केवल निगम नहीं, बल्कि आम जनता की सुविधा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी भारी पड़ेगा।



