
हिमाचल प्रदेश में सरकारी धन के दुरुपयोग और वन नियमों की अनदेखी पर कैग (भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में बिना पूर्व अनुमोदन और कार्ययोजना के कुल 3.06 करोड़ रुपये की लागत से पांच नए विश्राम गृह बना दिए गए।
5 विश्राम गृह बनाए गए, जिनमें 8 कमरे (VIP कमरे सहित) शामिल हैं। निर्माण में वन संरक्षण अधिनियम का पालन नहीं हुआ।
अटल टनल रोहतांग की योजना अधूरी
12.09 करोड़ रुपये की मलबा पुनर्वास योजना को 13 साल पहले मंजूरी मिली, लेकिन आज तक लागू नहीं हुई।
प्रतिपूरक वनीकरण कोष का दुरुपयोग
2016-17 से 2021-22 के बीच मिली निधि में से 169.73 करोड़ रुपये (20%) खर्च नहीं किए गए, 6.51 करोड़ रुपये गाइडलाइन के खिलाफ ईको और नेचर पार्क पर खर्च कर दिए गए, जबकि इन्हें अवक्रमित वन भूमि पर लगना था।
वन मंजूरी मामलों की अनदेखी
वन विभाग को मिली 1,018 परियोजनाओं में से 766 मामले आज भी लंबित हैं, इनमें से 17% राज्य वन विभाग में फंसे, शेष अन्य एजेंसियों में विभाग 3.29 करोड़ रुपये की प्रतिपूरक वनीकरण राशि वसूलने में विफल रहा।
ग्लोबल वार्मिंग से निपटने में लापरवाही,1.01 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी 500 हेक्टेयर हाई एल्टीट्यूड ट्रांजिशन जोन विकसित नहीं किया गया, पर्यावरण मंत्रालय की शर्तों का चार वर्षों तक उल्लंघन, 3.29 करोड़ रुपये के दंड की भी वसूली नहीं हो सकी।
कैग की टिप्पणी
कैग ने रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि राज्य प्राधिकरण की बैठकें समय पर नहीं हुईं, योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही की भारी कमी रही। साथ ही वन संसाधनों की रक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में गंभीर चूक हुई है, कैग का खुलासा: हिमाचल में बिना मंजूरी बने 3.06 करोड़ के विश्राम गृह, 766 वन प्रोजेक्ट लंबित



