
एचपीटीडीसी ने घाटे और प्रबंधन सुधार के मद्देनज़र लिया फैसला, निजीकरण की प्रक्रिया के बीच सामने आई बड़ी कार्रवाई
हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) ने अपने अधीनस्थ 13 होटलों की ऑनलाइन बुकिंग सुविधा बंद करने का फैसला लिया है। यह निर्णय 1 नवंबर 2025 से प्रभावी होगा। निगम के प्रबंध निदेशक राजीव कुमार द्वारा जारी एक अधिसूचना में इस आदेश की पुष्टि की गई है।
फैसले की पृष्ठभूमि: घाटा, हाईकोर्ट के आदेश और निजीकरण
एचपीटीडीसी का यह कदम उस समय सामने आया है जब
14 होटलों को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया चल रही है
और हाल ही में हिमाचल हाईकोर्ट घाटे में चल रहे 18 होटलों को बंद करने के आदेश दे चुका है।
वर्तमान में एचपीटीडीसी का वार्षिक टर्नओवर लगभग ₹109 करोड़ है, जबकि निगम के पास ₹168 करोड़ की वसूली योग्य राशि और करीब ₹40 करोड़ की देनदारियां भी हैं।
आदेश के मुख्य बिंदु
ऑनलाइन बुकिंग 13 होटलों के लिए 1 नवंबर से बंद होगी।
पहले से की गई बुकिंग को समायोजित करने और मेहमानों को पूर्व सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।
सभी विपणन कार्यालयों और कांप्लेक्स प्रभारियों को इस फैसले की जानकारी भेज दी गई है।
एचपीटीडीसी की वेबसाइट पर भी अधिसूचना प्रकाशित की जा चुकी है।

इन 13 होटलों की ऑनलाइन बुकिंग होगी बंद:
होटल हिलटॉप, स्वारघाट
होटल लेकव्यू, बिलासपुर
होटल बाघल, दरलाघाट
होटल ममलेश्वर, चिंदी
होटल एप्पल ब्लॉसम, फागु
होटल शिवालिक, परवाणू
गिरीगंगा रिज़ॉर्ट, खरापत्थर
होटल चांशल, रोहड़ू
होटल टूरिस्ट इन, राजगढ़
होटल सरवरी, कुल्लू
होटल रोज कॉमन, कसौली
होटल कश्मीर हाउस, धर्मशाला
होटल उहल, जोगिंदरनगर
उद्देश्य: सेवा सुधार और प्रबंधन को सुगम बनाना
एचपीटीडीसी का कहना है कि यह निर्णय प्रबंधन को अधिक सुचारु बनाने और अतिथियों को बेहतर सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि, पर्यटन और होटल उद्योग से जुड़े लोगों में यह फैसला मिश्रित प्रतिक्रियाएं लेकर आया है।
हिमाचल प्रदेश में पर्यटन का चेहरा बदलने की दिशा में यह एक अहम और बड़ा प्रशासनिक फैसला है। अब देखना होगा कि इससे पर्यटन निगम की वित्तीय स्थिति और संचालन दक्षता में क्या सुधार आता है।



