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दियोटसिद्ध मंदिर में सौर ऊर्जा से होगा बिजली संकट का समाधान

हमीरपुरउत्तर भारत के प्रमुख सिद्ध पीठों में शुमार दियोटसिद्ध स्थित बाबा बालकनाथ मंदिर में शीघ्र ही व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। मंदिर न केवल आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है, बल्कि आधुनिक और टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की ओर भी तेजी से कदम बढ़ा रहा है। मंदिर न्यास द्वारा सौर ऊर्जा को अपनाने की दिशा में अहम फैसला लिया गया है, जिसके तहत अब 40 किलोवाट क्षमता वाला सनरूफ सोलर प्लांट लगाया जाएगा। इस परियोजना के लिए ₹16 लाख का बजट मंजूर हो चुका है, जो मंदिर न्यास के खाते से वहन किया जाएगा।

ऊर्जा बचत की दिशा में ऐतिहासिक कदम
बाबा बालकनाथ मंदिर की ऊर्जा जरूरतें काफी अधिक हैं, क्योंकि यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं और विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए भारी मात्रा में बिजली की खपत होती है। वर्तमान में मंदिर का मासिक बिजली बिल ₹2.5 से ₹3 लाख तक पहुंचता है, जो न्यास के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

इसी समस्या से निपटने के लिए मंदिर प्रशासन ने पहले भी 10 और 15 किलोवाट क्षमता वाले दो सोलर प्लांट हिमऊर्जा की मदद से स्थापित किए थे। हालांकि, ये प्लांट मंदिर की समग्र ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में पर्याप्त नहीं थे। इसलिए अब एक 40 किलोवाट का बड़ा सनरूफ सोलर प्लांट लगाने की योजना तैयार की गई है, जिससे मंदिर की अधिकांश बिजली जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।

हर साल 36 लाख रुपये की होगी बचत
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, नए सोलर प्लांट के लगने से मंदिर को मासिक रूप से लगभग ₹3 लाख की बिजली बचत होगी। सालाना यह बचत ₹36 लाख तक पहुंच सकती है। इस प्रकार यह परियोजना न केवल पर्यावरण के लिहाज से फायदेमंद होगी, बल्कि आर्थिक रूप से भी मंदिर न्यास को दीर्घकालिक राहत देगी।

विकास की ओर अग्रसर बाबा की नगरी
उल्लेखनीय है कि बाबा बालकनाथ मंदिर क्षेत्र में वर्तमान में ₹65 करोड़ की लागत से एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) प्रायोजित विकास कार्य भी चल रहे हैं। इसमें बुनियादी ढांचे का विकास, यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं, रास्तों का सौंदर्यीकरण और स्वच्छता संबंधी परियोजनाएं शामिल हैं। ऐसे में बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बिजली की मांग और अधिक बढ़नी तय है, जिसे सौर ऊर्जा से ही संतुलित करने की कोशिश की जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रयास
यह पहल न केवल मंदिर प्रशासन की दूरदर्शिता को दर्शाती है, बल्कि हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) की ओर एक ठोस कदम भी है। जब देश और दुनिया कार्बन उत्सर्जन को कम करने के प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में बाबा बालकनाथ मंदिर द्वारा सौर ऊर्जा को अपनाना एक प्रेरणास्पद उदाहरण बन सकता है।

बाबा बालकनाथ मंदिर की यह ऊर्जा परियोजना धार्मिक स्थलों के आधुनिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य मंदिरों और धार्मिक स्थलों के लिए भी सौर ऊर्जा के उपयोग को लेकर प्रेरणा बनेगा।

Kullu Update
Author: Kullu Update

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