
शिमला, हिमाचल प्रदेश में नशे के मामलों की जांच अब और तेज व सटीक होगी। राज्य सरकार धर्मशाला और मंडी में जल्द ही डेडिकेटेड फोरेंसिक नारकोटिक्स लैब स्थापित करने जा रही है। इससे प्रदेश में स्वापक औषधि एवं मन प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) से जुड़े मामलों की जांच समय पर पूरी हो सकेगी।
जुन्गा लैब पर बढ़ता बोझ
फिलहाल पूरे प्रदेश से एनडीपीएस मामलों की जांच शिमला स्थित जुन्गा फोरेंसिक लैब में ही की जाती है। यहां हर महीने करीब 180 से 200 मामले जांच के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे कार्यभार लगातार बढ़ रहा है। नई लैब खुलने से इस दबाव में कमी आएगी।
जिलों को मिलेगी राहत
धर्मशाला लैब : ऊना, कांगड़ा और चंबा जिलों के एनडीपीएस मामलों की जांच करेगी।
मंडी लैब : हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, कुल्लू और किन्नौर जिलों के मामलों की जांच करेगी।
इससे न केवल मामलों के निपटारे में तेजी आएगी बल्कि शिमला तक फाइलें भेजने की परेशानी से भी छुटकारा मिलेगा।
10 नए पद सृजित होंगे
धर्मशाला और मंडी में नई लैब शुरू होने से विशेषज्ञों और कर्मचारियों के करीब 10 पद भी सृजित किए जाएंगे।
राज्य फोरेंसिक सर्विसेज निदेशालय शिमला की निदेशक डा. मीनाक्षी महाजन ने बताया कि मंडी और धर्मशाला की क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं में एनडीपीएस मामलों की जांच शुरू करने के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही दोनों जोनों में लैब का काम शुरू कर दिया जाएगा।



