
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में मानवता को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। देहरा के सीयू देहरा कैंपस से गायब हुए बिहार के प्रवासी मजदूर लक्ष्मी के 9 वर्षीय बेटे की सात दिन बाद जंगल में लाश मिली। जांच में पुलिस ने हत्या की गुत्थी सुलझा ली है, लेकिन बच्चे के परिजनों पर भी शक बना हुआ है।
4 सितंबर को मधुबनी (बिहार) से आए प्रवासी मजदूर ने देहरा पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज कराई कि उसका 9 साल का बेटा अचानक गायब हो गया। तत्परता से जांच में SDRF, डॉग स्क्वायड, ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी फुटेज की मदद से सुराग जुटाए गए। डीएसपी मयंक चौधरी के नेतृत्व में आठ टीमों ने मामले की जांच शुरू की।
महत्वपूर्ण सुरागों के आधार पर लक्ष्मी (31 वर्ष) नामक मजदूर पर संदेह हुआ। कड़ी पूछताछ में आरोपी ने सनसनीखेज कबूलनामा दिया। उसने बताया कि आपसी विवाद के चलते गुस्से में आकर उसने बच्चे का गला दबाकर हत्या कर दी और शव को एचआरटीसी वर्कशॉप की तरफ जंगल में फेंक दिया। आरोपी को घटनास्थल पर लेकर वारदात का रिक्रिएशन भी कराया गया। शव को सिविल अस्पताल देहरा में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जहाँ परिजनों ने उसकी पहचान की।
एसपी मयंक चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह घटना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि हत्या की गुत्थी तो सुलझा ली गई है, लेकिन हर पहलू की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच से यह भी सामने आया है कि मृतक के माता-पिता और लक्ष्मी के बीच गहरी रंजिश थी। इसी कारण हत्या की आशंका जताई जा रही है।
एसपी चौधरी ने आमजन से भी अपील की कि यदि किसी के पास इस मामले से जुड़ी कोई जानकारी हो, तो पुलिस से साझा करें, ताकि अन्य तथ्य उजागर हो सकें।
इस सनसनीखेज घटना ने पूरे क्षेत्र को सदमे में डाल दिया है। लोगों ने मासूम की निर्मम हत्या पर गहरा आक्रोश जताया है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। प्रशासन ने मृतक परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। पुलिस अब इस मामले की पूरी गहराई से जांच कर न्यायालय में प्रस्तुत करेगी।



